Powwow Report for Indien - Noida (Jan 17 2010)


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Report from  C.M. Rawal
First Workshop on CAT Tools for English-Hindi Translators - Report
अंग्रेज़ी-हिंदी अनुवादकों के लिए कैट टूल्स पर प्रथम कार्यशाला - रिपोर्ट

रिपोर्ट प्रस्तुतकर्ता: श्री सुयश सुप्रभ

भारतीय अनुवादक संघ (ITA India) के उपाध्यक्ष और प्रोज़ डॉट कॉम (ProZ.com) के सदस्य श्री चन्द्र मोहन रावल ने 17 जनवरी, 2010 को नोएडा में अपने निवास स्थल पर हिंदी अनुवादकों के लिए पहली कैट टूल कार्यशाला का आयोजन किया। उनकी इस पहल से ऐसे कई अनुवादक लाभान्वित हुए जो कैट टूलों का उपयोग करने में अपनी असमर्थता के कारण अनेक प्रोजेक्ट गंवा देते हैं। अनुवाद के क्षेत्र में कैट टूलों के बढ़ते महत्व को देखते हुए उनकी यह पहल निस्संदेह प्रशंसनीय है।

इस कार्यशाला में श्री विजय कुमार मल्होत्रा, श्री राकेश दुबे, श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच, डॉ. स्मिता मिश्र, श्री प्रकाश शर्मा, श्री सुयश सुप्रभ, श्री आनंद दुबे और श्रीमती सुनीति गुप्ता ने भाग लिया। चाय आदि की व्यवस्था का भार श्रीमती मृदुला रावल ने संभाला।

कार्यशाला के पहले सत्र में अपनी प्रस्तुति में रावल जी ने कैट टूलों की उपयोगिता और उनके सैद्धांतिक पक्षों पर प्रकाश डाला। इस सत्र का आरंभ करने से पहले उन्होंने विशेष रूप से श्री विजय कुमार मल्होत्रा के प्रति आभार व्यक्‍त करते हुए बताया कि इस कार्यशाला का आयोजन उनकी प्रेरणा से ही हुआ है। रावल जी ने अंग्रेज़ी-हिंदी अनुवादकों के लिए हिंदी माध्यम से आयोजित इस कार्यशाला की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए बताया कि प्रशिक्षण के तौर पर उन्हें विभिन्न कैट टूलों के जिन परिचयात्मक प्रदर्शनों को देखने का अवसर मिला वे अंग्रेज़ी-फ़्रांसीसी और अंग्रेज़ी-स्पेनी जैसे भाषा-युग्मों में थे, इसलिए उन्होंने महसूस किया कि हिंदी अनुवादकों की विशिष्ट आवश्यकताओं को देखते हुए इस कार्यशाला का आयोजन अंग्रेज़ी-हिंदी भाषा-युग्म में और हिंदी माध्यम से किया जाए।

इसके बाद उन्होंने मैट (मशीन ऐडेड ट्रांसलेशन) और कैट (कंप्यूटर ऐडेड ट्रांसलेशन) में अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि मैट में पाठ को स्रोत भाषा से लक्ष्य भाषा में अनूदित करने की प्रक्रिया में मानव की कोई भूमिका नहीं होती है। इसके विपरीत कैट में अनुवाद मानव ही करता है और इससे शब्दों के प्रयोग, वर्तनी आदि में एकरूपता को बनाए रखने और अनुवाद की गुणवत्ता सुनिश्‍चित करने में मदद मिलती है। मशीन अनुवाद में संदर्भ का ध्यान नहीं रखा जाता है और अपनी अपूर्णता के कारण यह मानवीय हस्तक्षेप के बिना प्राय: आसानी से समझ में नहीं आता है। रावल जी ने इस संदर्भ में अंग्रेज़ी की एक अभिव्यक्‍ति के अनुवाद का रोचक उदाहरण दिया। उन्होंने एक बार मैट टूल से अंग्रेज़ी के पदबंध 'chicken fried rice' का हिंदी में अनुवाद किया। अनूदित पाठ देखकर वे आश्‍चर्यचकित रह गए। मशीन अनुवाद था – ‘चूज़े ने चावल तले’। इस तरह हम देखते हैं कि मशीन अनुवाद में संदर्भ, लक्ष्य भाषा की पद-रचना आदि की उपेक्षा होने के कारण कई बार अनुवाद के हास्यास्पद उदाहरण सामने आते हैं।

रावल जी ने वेब पृष्ठ जैसे पाठ प्रारूप में अनुवाद की जटिल प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए इस संदर्भ में कैट टूलों की उपयोगिता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रारूपों में टैगों के बिगड़ने की पूरी आशंका होती है और कैट टूलों का उपयोग करने से अनुवादकों की यह समस्या दूर हो जाती है क्योंकि इसमें अनूदित किए जाने वाले पाठ को इन टैगों से अलग करके प्रस्तुत किया जाता है। साथ ही, एमएस एक्सेल और पावर प्वाइंट आदि के दस्तावेज़ों की सामग्री का अनुवाद भी कैट टूलों की सहायता से शीघ्रता और सुगमता से किया जा सकता है। इससे न केवल अनुवाद में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का अनुपालन सुनिश्‍चित करना संभव होता है, बल्कि अनुवादकों का समय और श्रम भी बचता है।
भोजनावकाश के दौरान श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच ने अपने ‘माध्यम’ सॉफ़्टवेयर के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि उन्होंने यह सॉफ़्टवेयर इंटरनेट पर देवनागरी लिपि और इंस्क्रिप्ट कुंजीपटल के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से बनाया है। यह सॉफ़्टवेयर उन अनुवादकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो अधिकतर प्रोजेक्टों में यूनिकोड मंगल फ़ॉन्ट का उपयोग करने के कारण कृतिदेव जैसे फ़ॉन्ट का उपयोग करने में कठिनाई अनुभव करते हैं। वे इस सॉफ़्टवेयर की सहायता से इंस्क्रिप्ट कुंजीपटल का उपयोग करते हुए कृतिदेव फ़ॉन्ट में टाइप कर सकते हैं। बालेन्दु जी ने यह भी बताया कि हाल ही में उन्होंने ‘माध्यम’ का जो नया संस्करण तैयार किया है उसमें बहुत-सी नई सुविधाएं उपलब्ध की गई हैं।

कार्यशाला के दूसरे सत्र में वर्डफ़ास्ट की मदद से एक अंग्रेज़ी पाठ का हिंदी में अनुवाद किया गया। रावल जी ने क्रमवार ढंग से स्रोत भाषा, लक्ष्य भाषा, सेग्मेंट, टीएम, शब्दावली आदि के बारे में बताया। उन्होंने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि सभी अनुवादकों को इतनी जानकारी मिल जाए जिससे वे बिना किसी समस्या के इस टूल का उपयोग कर सकें। उन्होंने तकनीकी विषयों को आसान शब्दों में समझाया और अनेक रोचक उदाहरण देकर माहौल को बोझिल नहीं होने दिया।

रावल जी ने इस कार्यशाला के आयोजन की आवश्यकता के बारे में बताते हुए कहा कि कैट टूलों के मैनुअलों में प्रयुक्‍त तकनीकी भाषा के कारण अनुवादकों को आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई महसूस होती है। कार्यशाला में अनुवादकों को ऐसी व्यावहारिक जानकारी मिलती है जो किसी पुस्तक में उपलब्ध नहीं होती है। विभिन्न उपलब्ध कैट टूलों में से वर्डफ़ास्ट के चयन का औचित्य बताते हुए रावल जी ने कहा कि इस टूल का नि:शुल्क संस्करण उपलब्ध है और अन्य टूलों की तुलना में इसका उपयोग करना अधिक आसान है।

श्री सुयश सुप्रभ ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्‍त की कि भारत में पहली बार हिंदी अनुवादकों को कैट टूलों का प्रशिक्षण देने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई है। उन्होंने भाषा और तकनीक दोनों में विशेषज्ञता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कई अनुवादक भाषा पर अपनी पकड़ के बावजूद अच्छे प्रोजेक्ट गंवा देते हैं क्योंकि वे वर्डफ़ास्ट जैसे किसी कैट टूल का उपयोग करना नहीं जानते हैं।

रावल जी ने कैट टूलों के महत्व को रेखांकित करते हुए दूसरा सत्र समाप्त किया। उन्होंने अनुवादकों को कैट टूलों से संबंधित समस्याओं के संदर्भ में हर संभव सहायता प्रदान करने की बात भी कही। प्रतिभागियों ने ऐसी अन्य कार्यशालाओं के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। अंत में रावल जी ने हिंदी अनुवाद के क्षेत्र में तकनीक के प्रति बढ़ते रुझान के बारे में बताते हुए इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया कि खराब मौसम के बावजूद हिंदी अनुवादक कैट टूलों की जानकारी प्राप्त करने के लिए दूर-दूर से इस कार्यशाला में आए।

प्रतिभागियों की ओर से धन्यवाद ज्ञापन करते हुए मल्होत्रा जी ने कहा, "यह एक महत्वपूर्ण बात है कि आज रावल जी ने इस कार्य को व्यक्‍तिगत स्तर पर किया है। इसका डॉक्यूमेंटेशन होना चाहिए और भविष्य में इसे किसी ब्लॉग या वेबसाइट के रूप में बड़े स्तर पर पेशेवर तरीके से भी होना चाहिए ताकि इसे पूरा कर लेने के बाद विश्‍व भर के लोग इस विषय पर ब्लॉग और स्काइप आदि के ज़रिए हिंदी में संवाद कर सकें और प्रश्‍न पूछ सकें। हम सभी रावल जी के प्रति कृतज्ञ हैं कि आपने इतना समय निकाला और इतने अच्छे ढंग से समझाया। हमने आज कैट टूल के बारे में उनसे जो कुछ सीखा है आगे भी उसका अभ्यास करते रहेंगे और उस पर चर्चा करते रहेंगे।"

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Report from  C.M. Rawal
Hello Romina,

The First Workshop on CAT Tools for English-Hindi Translators was organized successfully on 17th January, 2010 in Noida.

I have just now submitted a detailed report of the Workshop prepared by one of the participants and a ProZ.com member, Mr. Suyash Suprabh.

Please post this Report in Hindi.

A summary of the report in English is appended below for information.

Thanks and best regards.

C.M. Rawal


SUMMARY OF THE REPORT ON THE FIRST WORKSHOP ON CAT TOOLS FOR ENGLISH-HINDI TRANSLATORS

C.M. Rawal, Vice-President, Indian Translators Association and Member, ProZ.com, organized the First Workshop on CAT Tools for English-Hindi Translators on 17th January, 2010 at his residence in NOIDA, India.

The workshop was attended by 8 participants, viz., Mr. Vijay Kumar Malhotra, Mr. Rakesh Dubey, Mr. Balendu Sharma Dadhich, Dr. Smita Mishra, Mr. Prakash Sharma, Mr. Suyash Suprabh, Mr. Anand Dubey and Mrs. Suniti Gupta.

This initiative provided an opportunity to the enthusiastic participants to get acquainted with the global scenario of translation, the use and usefulness of CAT tools for translation as also the actual working of a CAT tool in English-Hindi pair.

In the beginning of the first session, Mr. Rawal apprised the participants about the purpose of specially organizing this workshop for English-Hindi translators through Hindi medium. Through his PowerPoint presentation he demonstrated the basic features and functions of CAT tools and explained the difference between Machine Translation or MAT (Machine Aided Translation) and CAT (Computer Assisted Translation). He pointed out that the machine translation doesn't really help the translators in their translations as there is no human intervention whereas in the translations done by a CAT tool, the translator has control over his translations. The translator can reap the benefits of Segmentation, TM, Glossary, Concordance and other functions of the CAT tools. He emphasized that by using a CAT tool, a translator can do the translation of Excel and PowerPoint documents easily and speedily and for translating tagged html documents, the use of a CAT tool is essential as it ensures that the tags remain intact.

In the post-lunch hands-on practice session, the participants saw the actual working of freely downloadable and easy to use CAT tool Wordfast. A sample text in English was translated into Hindi, segment-by-segment with the help of Wordfast. The participants learnt to create a TM and a Glossary and add new terms to a Glossary. This proved to be a very interactive and vibrant session. The participants felt that there was a need for arranging more such workshops in future. Speaking on behalf of the participants, Mr. Malhotra thanked Mr. Rawal for arranging this event on an individual level and commented that this individual effort needs to be documented and developed on a large scale in the form of a professional blog or website where the people world-over may be able to communicate and ask questions on this topic in Hindi through Skype, etc. He assured that whatever we have learnt from him today, we would continue to put that into practice.

- C.M. Rawal



Photos from  C.M. Rawal


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ProZ.com users and members who attended
: organizer : photos : report : host
PRAKASH SHARMA
C.M. Rawal
\"Reporter\"
Suyash Suprabh
\"Reporter\"
आनंद
Vijay K Malhotra

Postings from ProZians who attended this event

Feb 15 '10  C.M. Rawal: कार्यशाला के अवसर पर लिए गए चित्र
चित्र 1 (बाएं)
कार्यशाला में श्री चन्द्र मोहन रावल की प्रस्तुति को प्रतिभागी बड़े ध्यानपूर्वक सुन रहे हैं।
बाएं से दाएं बैठे हैं: सामने की पंक्ति में श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच, श्री प्रकाश शर्मा, श्रीमती सुनीति गुप्ता, श्री आनंद दुबे और श्री सुयश सुप्रभ तथा पीछे की पंक्ति में श्री विजय कुमार मल्होत्रा और डॉ. स्मिता मिश्र।
(चित्र श्री राकेश दुबे ने लिया)।

चित्र 2 (दाएं)
कार्यशाला में श्री चन्द्र मोहन रावल अपनी प्रस्तुति को पूरे मनोयोग से प्रस्तुत करते हुए जिसे प्रतिभागी तल्लीन होकर सुन रहे हैं।
बाएं से दाएं बैठे हैं: सामने की पंक्ति में श्री प्रकाश शर्मा, श्रीमती सुनीति गुप्ता, श्री आनंद दुबे और श्री सुयश सुप्रभ तथा पीछे की पंक्ति में श्री राकेश दुबे, श्री विजय कुमार मल्होत्रा और डॉ. स्मिता मिश्र।
(चित्र श्री बालेन्दु शर्मा दाधीच ने लिया)।
Jan 27 '10  Suyash Suprabh: सफल आयोजन
भारत में हिंदी अनुवादकों के लिए पहली कैट टूल कार्यशाला का आयोजन पूरी तरह सफल रहा। इस कार्यशाला में भाषा पर पकड़ और तकनीकी जानकारी के बीच की खाई को पाटने के लिए नए विचार भी सामने आए। आशा है कि भविष्य में ऐसी अनेक कार्यशालाओं का आयोजन होगा। इससे भारत में अनुवादकों को कैट टूलों से संबंधित ऐसी जानकारी मिल सकेगी जो मैनुअलों में प्राय: अनुपलब्ध होती है।
Jan 17 '10  PRAKASH SHARMA: Thanks to Mr. Rawal!
Thank you very much!

रावल साहब का नितांत व्‍यक्तिगत स्‍तर पर किया गया गया सुप्रयास अत्‍यंत श्‍लाघनीय रहा। मुझे खुशी है कि मैं भी इसका एक हिस्‍सा बना, जहां मैंने Wordfast के शुरूआती टिप्‍स तो लिए ही, वहीं मैं सुयश, dubsur आदि मित्रों से भी साक्षात् मिला और अपने विचारों का व्‍यक्तिगत स्‍तर पर आदान-प्रदान किया।
नितांत एकाकी स्‍तर पर आगे बढ़कर बांग्‍ला उक्ति \'एक्‍ला चलो\' की तर्ज़ पर किए गए ऐसे सफल आयोजन के लिए रावल साहब बधाई के पात्र हैं। बधाई हो रावल जी!